मैं कबूतरों को उड़ाता हूँ और देखता हूँ

  - Mumtaz Gurmani
मैंकबूतरोंकोउड़ाताहूँऔरदेखताहूँ
फ़ज़ाकाहुस्नबढ़ाताहूँऔरदेखताहूँ
येआँखमुफ़्तमेंकुछभीनहींदिखातीमुझे
मैंइसकोख़्वाबदिखाताहूँऔरदेखताहूँ
सुनाईदेताहैकिसकिसकोकौनसुनताहै
गलीमेंशोरमचाताहूँऔरदेखताहूँ
कभीमैंपूछतारहताथाकौनहैदरपर
औरअबमैंदौड़केजाताहूँऔरदेखताहूँ
धमालडालनेआताहैरोज़एकमलंग
मैंरोज़देखनेजाताहूँऔरदेखताहूँ
सुनाहैमौतमुदावाहैज़ीस्तकेग़मका
रुकोमैंजानसेजाताहूँऔरदेखताहूँ
हयासेकैसेबदलतीहैरंगत-ए-रुख़्सार
मैंउसकोशे'रसुनाताहूँऔरदेखताहूँ
कशिशज़मीनमेंज़्यादाहैआसमानमेंकम
हवामेंख़ाकउड़ाताहूँऔरदेखताहूँ
जोशख़्सप्यारकामुनकिरहैसामनेआए
मैंउससेआँखमिलाताहूँऔरदेखताहूँ
  - Mumtaz Gurmani
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