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Manmauji
zahar to poora ka poora pee li.e the aap bhole
zahar to poora ka poora pee li.e the aap bhole | ज़हर तो पूरा का पूरा पी लिए थे आप भोले
- Manmauji
ज़हर
तो
पूरा
का
पूरा
पी
लिए
थे
आप
भोले
फिर
भला
ये
आदमी
क्या
खा
के
ज़हरीला
हुआ
है
- Manmauji
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अच्छी
बुरी
हर
इक
कमी
के
साथ
हैं
हम
यार
आँखों
की
नमी
के
साथ
हैं
दो
जिस्म
ब्याहे
जा
रहे
हैं
आज
भी
हम
सब
पराए
आदमी
के
साथ
हैं
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Neeraj Neer
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इंसान
अपने
आप
में
मजबूर
है
बहुत
कोई
नहीं
है
बे-वफ़ा
अफ़्सोस
मत
करो
Bashir Badr
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उस
के
दुश्मन
हैं
बहुत
आदमी
अच्छा
होगा
वो
भी
मेरी
ही
तरह
शहर
में
तन्हा
होगा
Nida Fazli
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देवताओं
का
ख़ुदास
होगा
काम
आदमी
को
आदमी
दरकार
है
Firaq Gorakhpuri
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सुब्ह-ए-मग़रूर
को
वो
शाम
भी
कर
देता
है
शोहरतें
छीन
के
गुमनाम
भी
कर
देता
है
वक़्त
से
आँख
मिलाने
की
हिमाकत
न
करो
वक़्त
इंसान
को
नीलाम
भी
कर
देता
है
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Nadeem Farrukh
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शबो
रोज़
की
चाकरी
ज़िन्दगी
की
मुयस्सर
हुईं
रोटियाँ
दो
घड़ी
की
नहीं
काम
आएँ
जो
इक
दिन
मशीनें
ज़रूरत
बने
आदमी
आदमी
की
कि
कल
शाम
फ़ुरसत
में
आई
उदासी
बता
दी
मुझे
क़ीमतें
हर
ख़ुशी
की
किया
क्या
अमन
जी
ने
बाइस
बरस
में
कभी
जी
लिया
तो
कभी
ख़ुद-कुशी
की
ग़मों
को
ठिकाने
लगाते
लगाते
घड़ी
आ
गई
आदमी
के
ग़मी
की
ये
सारी
तपस्या
का
कारण
यही
है
मिसालें
बनें
तो
बनें
सादगी
की
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Aman G Mishra
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इत्तिफ़ाक़
अपनी
जगह
ख़ुश-क़िस्मती
अपनी
जगह
ख़ुद
बनाता
है
जहाँ
में
आदमी
अपनी
जगह
Anwar Shaoor
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मत
सहल
हमें
जानो
फिरता
है
फ़लक
बरसों
तब
ख़ाक
के
पर्दे
से
इंसान
निकलते
हैं
Meer Taqi Meer
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जो
मेरे
साथ
मोहब्बत
में
हुई
आदमी
एक
दफा
सोचेगा
रात
इस
डर
में
गुजारी
हमने
कोई
देखेगा
तो
क्या
सोचेगा
Tehzeeb Hafi
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बस्ती
में
अपनी
हिन्दू
मुसलमाँ
जो
बस
गए
इंसाँ
की
शक्ल
देखने
को
हम
तरस
गए
Kaifi Azmi
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किसी
क़ीमत
पर
उनकी
आँख
में
आँसू
नहीं
मंज़ूर
मगर
ख़ुश
हूँ
कि
वो
कल
ता-सहर
मेरे
लिए
रोए
Manmauji
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कड़ी
धूप
थी,पाँव
जलते
रहे
मुसाफ़िर
थे,चलना
था,चलते
रहे
कभी
लड़खड़ा
के
गिरे
मुँह
के
बल
कभी
लड़खड़ा
के
सँभलते
रहे
खले
ना
किसी
की
नज़र
में
कभी
ख़ुद
अपनी
नज़र
में
ही
खलते
रहे
उठाया
जिन्हें
पीठ
पर
उम्र
भर
जनाज़े
में
काँधे
बदलते
रहे
अमीरों
की
आँखों
ने
छोड़े
जो
ख़्वाब
वो
मुफ़्लिस
की
आँखों
में
पलते
रहे
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Manmauji
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फ़क़त
गले
से
लगाकर
ख़रीद
सकते
थे
अब
इस
सेे
और
तो
सस्ता
मैं
ख़ुद
को
क्या
करता
Manmauji
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कुछ
एक
ज़ख़्म
तो
ऐ
चारा-गर
हरे
रखना
बस
इक
यही
तो
निशानी
है
मेरे
पास
उनकी
Manmauji
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मैं
अंजुमन
को
तेरी
कहकहों
से
भर
दूँ
मगर
लिहाफ़-ए-ख़ामुशी
हालात
का
तक़ाज़ा
है
Manmauji
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