sukhanvar gham kushaada kar rahe hain | सुख़न-वर ग़म कुशादा कर रहे हैं

  - Manmauji
सुख़न-वरग़मकुशादाकररहेहैं
पुरानेज़ख़्मताज़ाकररहेहैं
कोईसमझाएअहल-ए-अक़्लइनको
ग़मोंकोक्यूँलबादाकररहेहैं
मुहब्बतहोगईआसानशायद
नएलड़केज़ियादाकररहेहैं
सफ़रथमजाएगामंज़िलमिलीतो
चुनाँचेइश्क़आधाकररहेहैं
उन्हेकिसमुँहसेमैंकहदूँसितमगर
वोयेसबहस्बवा'दाकररहेहैं
  - Manmauji
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