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Mrkknathji
burii nazar se tumhein bachaata nazar utaari karta hai
burii nazar se tumhein bachaata nazar utaari karta hai | बुरी नज़र से तुम्हें बचाता नज़र उतारी करता है
- Mrkknathji
बुरी
नज़र
से
तुम्हें
बचाता
नज़र
उतारी
करता
है
जी
होंठों
का
ये
तिल
तुम्हारी
पहरेदारी
करता
है
- Mrkknathji
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ये
सोचता
हूँ
क्यूँ
किया
आज़ाद
चूमकर
क्यूँ
दिन
गुज़ारे
हमने
तेरी
याद
चूमकर
उस
एक
पल
लगा
कि
ये
सब
सेे
हसीन
है
अगले
ही
पल
वो
कर
गया
बर्बाद
चूमकर
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Mrkknathji
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जान
कहने
वाले
मुझको
जान
से
ही
मार
दे
सामने
से
आ
मेरे
सीने
में
खंज़र
तार
दे
Mrkknathji
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तेरी
यादों
की
चिता
कब
तक
सजाएँगे
आग
तो
देनी
पड़ेगी
साँझ
से
पहले
Mrkknathji
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वो
बेख़बर
ख़बर
से
अनजान
बन
गया
था
मैं
पल
दो
पल
का
ही
मेहमान
बन
गया
था
Mrkknathji
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जाने
कैसे
कब
मिल
जाते
लब
से
आकर
लब
मिल
जाते
कभी
न
मिलते
आँखों
देखे
मन
से
देखे
रब
मिल
जाते
हिन्दू
मुस्लिम
सिख
ईसाई
इक
दिन
सब
मज़हब
मिल
जाते
गज़लें
कहने
को
मुझको
भी
लहजे
और
अदब
मिल
जाते
अजब
ग़ज़ब
है
भूले
भटके
लड़ते
लड़ते
सब
मिल
जाते
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Mrkknathji
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