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Mrkknathji
jaan kehne waale mujhko jaan se hi maar de
jaan kehne waale mujhko jaan se hi maar de | जान कहने वाले मुझको जान से ही मार दे
- Mrkknathji
जान
कहने
वाले
मुझको
जान
से
ही
मार
दे
सामने
से
आ
मेरे
सीने
में
खंज़र
तार
दे
- Mrkknathji
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अभी
तो
जान
कहता
फिर
रहा
है
तू
तुझे
हम
हिज्र
वाले
साल
पूछेंगे
Parul Singh "Noor"
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तुम्हें
हुस्न
पर
दस्तरस
है
मोहब्बत
वोहब्बत
बड़ा
जानते
हो
तो
फिर
ये
बताओ
कि
तुम
उस
की
आँखों
के
बारे
में
क्या
जानते
हो
ये
जुग़राफ़िया
फ़ल्सफ़ा
साईकॉलोजी
साइंस
रियाज़ी
वग़ैरा
ये
सब
जानना
भी
अहम
है
मगर
उस
के
घर
का
पता
जानते
हो
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Tehzeeb Hafi
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जब
तलक
अनजान
थे
मेहफ़ूज़
थे
जान
लेना
जानलेवा
हो
गया
Vishal Bagh
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ये
तेरे
ख़त
ये
तेरी
ख़ुशबू
ये
तेरे
ख़्वाब-ओ-ख़याल
मता-ए-जाँ
हैं
तेरे
कौल
और
क़सम
की
तरह
गुज़िश्ता
साल
मैंने
इन्हें
गिनकर
रक्खा
था
किसी
ग़रीब
की
जोड़ी
हुई
रक़म
की
तरह
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Jaun Elia
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चुरायगा
उसी
से
आँख
क़ातिल
ज़रा
सी
जान
जिस
बिस्मिल
में
होगी
Dagh Dehlvi
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इसी
से
जान
गया
मैं
कि
बख़्त
ढलने
लगे
मैं
थक
के
छाँव
में
बैठा
तो
पेड़
चलने
लगे
मैं
दे
रहा
था
सहारे
तो
इक
हुजूम
में
था
जो
गिर
पड़ा
तो
सभी
रास्ता
बदलने
लगे
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Farhat Abbas Shah
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न
खाओ
क़स
में
वग़ैरा
न
अश्क
ज़ाया'
करो
तुम्हें
पता
है
मेरी
जान
हक़-पज़ीर
हूँ
मैं
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Amaan Haider
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रहते
थे
कभी
जिन
के
दिल
में
हम
जान
से
भी
प्यारों
की
तरह
बैठे
हैं
उन्हीं
के
कूचे
में
हम
आज
गुनहगारों
की
तरह
Majrooh Sultanpuri
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जान-लेवा
थीं
ख़्वाहिशें
वर्ना
वस्ल
से
इंतिज़ार
अच्छा
था
Jaun Elia
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राहों
में
जान
घर
में
चराग़ों
से
शान
है
दीपावली
से
आज
ज़मीन
आसमान
है
Obaid Azam Azmi
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क्या
बतलाएँ
कैसे
कैसे
यार
मिले
जितने
भी
थे
सब
के
सब
ग़द्दार
मिले
Mrkknathji
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एक
एक
करके
पहले
बे-नक़ाब
कर
दिया
रौंद
डाले
फिर
सभी
नक़ाब
ठोकरों
तले
Mrkknathji
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तेरी
यादों
की
चिता
कब
तक
सजाएँगे
आग
तो
देनी
पड़ेगी
साँझ
से
पहले
Mrkknathji
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छीन
ली
ज़िन्दगी
ज़िन्दगी
के
लिए
आज
मरना
पड़ा
ख़ुद-कुशी
के
लिए
ढक
गया
जब
जहाँ
तम
की
आग़ोश
में
घर
जलाना
पड़ा
रौशनी
के
लिए
चाँदनी
रौशनी
छोड़कर
सब
यहाँ
चल
पड़े
हम
कहाँ
तीरगी
के
लिए
इसलिए
तोड़ना
पड़
गया
दिल
हमें
रात
काफ़ी
नहीं
शा'इरी
के
लिए
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Mrkknathji
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ये
सोचता
हूँ
क्यूँ
किया
आज़ाद
चूमकर
क्यूँ
दिन
गुज़ारे
हमने
तेरी
याद
चूमकर
उस
एक
पल
लगा
कि
ये
सब
सेे
हसीन
है
अगले
ही
पल
वो
कर
गया
बर्बाद
चूमकर
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Mrkknathji
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