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Mrkknathji
jaane kaise kab mil jaate
jaane kaise kab mil jaate | जाने कैसे कब मिल जाते
- Mrkknathji
जाने
कैसे
कब
मिल
जाते
लब
से
आकर
लब
मिल
जाते
कभी
न
मिलते
आँखों
देखे
मन
से
देखे
रब
मिल
जाते
हिन्दू
मुस्लिम
सिख
ईसाई
इक
दिन
सब
मज़हब
मिल
जाते
गज़लें
कहने
को
मुझको
भी
लहजे
और
अदब
मिल
जाते
अजब
ग़ज़ब
है
भूले
भटके
लड़ते
लड़ते
सब
मिल
जाते
- Mrkknathji
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बहुत
चल
बसे
यार
ऐ
ज़िंदगी
कोई
दिन
की
मेहमान
तू
रह
गई
Dagh Dehlvi
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अदब
ता'लीम
का
जौहर
है
ज़ेवर
है
जवानी
का
वही
शागिर्द
हैं
जो
ख़िदमत-ए-उस्ताद
करते
हैं
Chakbast Brij Narayan
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न
जाने
कब
से
इक
मतला
लिए
बैठा
हूँ
महफ़िल
में
तुम्हारा
ज़िक्र
कर
दे
कोई
तो
पूरी
ग़ज़ल
कर
लूँ
Harsh saxena
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महीनों
तक
रहा
करते
थे
सब
मेहमान
आँखों
में,
मगर
अब
ख़्वाब
भी
आते
नहीं
वीरान
आँखों
में
ज़मान
ए
हिज्र
कहने
को
रिवाज़
ए
इश्क़
ही
तो
है,
मगर
क्या
क्या
नहीं
होता
है
इस
दौरान
आँखों
में
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Darpan
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ज़ेहन
से
यादों
के
लश्कर
जा
चुके
वो
मेरी
महफ़िल
से
उठ
कर
जा
चुके
मेरा
दिल
भी
जैसे
पाकिस्तान
है
सब
हुकूमत
करके
बाहर
जा
चुके
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Tehzeeb Hafi
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अदब
वाले
अदब
की
महफ़िलें
पहचान
लेते
हैं
उन्हें
तुम
प्यार
से
कुछ
भी
कहो
वो
मान
लेते
हैं
जहाँ
तक
देख
सकते
हैं
वहाँ
तक
सुन
नहीं
सकते
मगर
जब
इश्क़
हो
जाए
तो
धड़कन
जान
लेते
हैं
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Hameed Sarwar Bahraichi
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उसने
महफ़िल
से
उठाया
हमको
जिसको
पलकों
पे
बिठाया
हमने
Vishal Bagh
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अगर
लगता
है
वो
क़ाबिल
नहीं
है
तो
रिश्ता
तोड़ना
मुश्किल
नहीं
है
रक़ीब
आया
है
मेरे
शे'र
सुनने
तो
अब
ये
जंग
है
महफ़िल
नहीं
है
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Tanoj Dadhich
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ऐ
दिल
की
ख़लिश
चल
यूँँही
सही
चलता
तो
हूँ
उन
की
महफ़िल
में
उस
वक़्त
मुझे
चौंका
देना
जब
रंग
पे
महफ़िल
आ
जाए
Behzad Lakhnavi
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मुझ
सेे
होकर
के
ही
बे-ज़ार
चले
जाते
हैं
मेरी
महफ़िल
से
मेरे
यार
चले
जाते
हैं
मुझको
मालूम
है
रहता
नहीं
है
अब
वो
वहाँँ
साल
में
फिर
भी
हम
इक
बार
चले
जाते
हैं
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Dipendra Singh 'Raaz'
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हम
यार
जिनपे
फ़ना
हो
रहे
थे
ख़ुद
गर्ज़
सारे
जुदा
हो
रहे
थे
Mrkknathji
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बुरी
नज़र
से
तुम्हें
बचाता
नज़र
उतारी
करता
है
जी
होंठों
का
ये
तिल
तुम्हारी
पहरेदारी
करता
है
Mrkknathji
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ये
सोचता
हूँ
क्यूँ
किया
आज़ाद
चूमकर
क्यूँ
दिन
गुज़ारे
हमने
तेरी
याद
चूमकर
उस
एक
पल
लगा
कि
ये
सब
सेे
हसीन
है
अगले
ही
पल
वो
कर
गया
बर्बाद
चूमकर
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Mrkknathji
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क्या
बतलाएँ
कैसे
कैसे
यार
मिले
जितने
भी
थे
सब
के
सब
ग़द्दार
मिले
Mrkknathji
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किसे
ख़बर
वो
इसकी
ख़ातिर
क्या
तैयारी
करता
है
दुश्मन
के
ख़े
में
में
जाकर
बात
हमारी
करता
है
जिन
घर
में
है
सुंदर
औरत
अच्छी
दौलत
ध्यान
रहे
ख़ुद
को
यार
बताने
वाला
सोच
के
यारी
करता
है
सत्य
सदा
कड़वा
होता
पर
देख
विभीषण
ये
जाना
तय
है
घर
का
पतन
अगर
भाई
ग़द्दारी
करता
है
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Mrkknathji
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