jise chaaha vahii apna to dilbar ho nahin saka | जिसे चाहा वही अपना तो दिलबर हो नहीं सकता

  - Puneet Mishra Akshat
जिसेचाहावहीअपनातोदिलबरहोनहींसकता
मुहब्बतकासबबहरदममुयस्सरहोनहींसकता
कभीग़रलगगयादामनपेधब्बाइसज़मानेका
तोकितनाकुछभीकरलोपरवोबेहतरहोनहींसकता
ज़लादोआजनफ़रतकोमुहब्बतकेहवालेसे
जहाँपरबैरहोसबसेेकभीघरहोनहींसकता
मिलेगाबसतुम्हेंउतनालिखाजितनानसीबोंमें
जिसेचाहेंवहीअपनामुकद्दरहोनहींसकता
जुदाहोकरसफ़रकेबीचसेफिरछोड़करजाना
हमारादिलतुम्हारेदिल-सापत्थरहोनहींसकता
  - Puneet Mishra Akshat
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