ye kah ga.e hain musaafir lute gharo waale | ये कह गए हैं मुसाफ़िर लुटे घरों वाले

  - Mohsin Naqvi
येकहगएहैंमुसाफ़िरलुटेघरोंवाले
डरेंहवासेपरिंदेखुलेपरोंवाले
येमेरेदिलकीहवसदश्त-ए-बे-कराँजैसी
वोतेरीआँखकेतेवरसमुंदरोंवाले
हवाकेहाथमेंकासेहैंज़र्दपत्तोंके
कहाँगएवोसख़ीसब्ज़चादरोंवाले
कहाँमिलेंगेवोअगलेदिनोंकेशहज़ादे
पहनकेतनपेलिबादेगदागरोंवाले
पहाड़ियोंमेंघिरेयेबुझेबुझेरस्ते
कभीइधरसेगुज़रतेथेलश्करोंवाले
उन्हींपेहोकभीनाज़िलअज़ाबआगअजल
वहीनगरकभीठहरेंपयम्बरोंवाले
तिरेसुपुर्दकरूँँआईनेमुक़द्दरके
इधरतोमिरेख़ुश-रंगपत्थरोंवाले
किसीकोदेखकेचुपचुपसेक्यूँँहुए'मोहसिन'
कहाँगएवोइरादेसुख़न-वरोंवाले
  - Mohsin Naqvi
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