phir vahii main hooñ vahii shahr-badar sannaata | फिर वही मैं हूँ वही शहर-बदर सन्नाटा

  - Mohsin Naqvi
फिरवहीमैंहूँवहीशहर-बदरसन्नाटा
मुझकोडसलेकहींख़ाक-बसरसन्नाटा
दश्त-ए-हस्तीमेंशब-ए-ग़मकीसहरकरनेको
हिज्रवालोंनेलियारख़्त-ए-सफ़रसन्नाटा
किससेपूछूँकिकहाँहैमिरारोनेवाला
इसतरफ़मैंहूँमिरेघरसेउधरसन्नाटा
तूसदाओंकेभँवरमेंमुझेआवाज़तोदे
तुझकोदेगामिरेहोनेकीख़बरसन्नाटा
उसकोहंगामा-ए-मंज़िलकीख़बरक्यादोगे
जिसनेपायाहोसर-ए-राहगुज़रसन्नाटा
हासिल-ए-कुंज-ए-क़फ़सवहम-ब-कफ़तन्हाई
रौनक़-ए-शाम-ए-सफ़रता-ब-सहरसन्नाटा
क़िस्मत-ए-शाइर-ए-सीमाब-सिफ़तदश्तकीमौत
क़ीमत-ए-रेज़ा-ए-अल्मास-ए-हुनरसन्नाटा
जान-ए-'मोहसिन'मिरीतक़दीरमेंकबलिक्खाहै
डूबताचाँदतिराक़ुर्ब-ए-गज़रसन्नाटा
  - Mohsin Naqvi
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