ashk apna ki tumhaara nahin dekha jaata | अश्क अपना कि तुम्हारा नहीं देखा जाता

  - Mohsin Naqvi
अश्कअपनाकितुम्हारानहींदेखाजाता
अब्रकीज़दमेंसितारानहींदेखाजाता
अपनीशह-ए-रगकालहूतनमेंरवाँहैजबतक
ज़ेर-ए-ख़ंजरकोईप्यारानहींदेखाजाता
मौज-दर-मौजउलझनेकीहवसबे-मा'नी
डूबताहोतोसहारानहींदेखाजाता
तेरेचेहरेकीकशिशथीकिपलटकरदेखा
वर्नासूरजतोदोबारानहींदेखाजाता
आगकीज़िदपेजाफिरसेभड़कसकतीहै
राखकीतहमेंशरारानहींदेखाजाता
ज़ख़्मआँखोंकेभीसहतेथेकभीदिलवाले
अबतोअबरूकाइशारानहींदेखाजाता
क्याक़यामतहैकिदिलजिसकानगरहै'मोहसिन'
दिलपेउसकाभीइजारानहींदेखाजाता
  - Mohsin Naqvi
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