ik raaz hai jo mujhpe abhii tak khula nahin | इक राज़ है जो मुझपे अभी तक खुला नहीं

  - Mohit Dixit
इकराज़हैजोमुझपेअभीतकखुलानहीं
उसकोकिसीसेइश्क़हुआभीहैयानहीं
उसकीहथेलियोंपेज़राग़ौरतोकरो
उन
मेंनिशाँकहींभीकिसीहाथकानहीं
वोजानताहैलोगउसेपूजतेभीहैं
ता'रीफ़वोकरोजोख़ुदउसकोपतानहीं
वोइकमुक़द्दसआगहैजिस
मेंजलेहैंसब
सबयानीसबकेसबकोईभीबचसकानहीं
उसआगमेंजलेहुओंकाहालक्याकहूँ
वोआगजिससेेबननाथासूरजबनानहीं
अपनीबनाईसोचमेंरहकरसोचउसे
उसजैसाइसजहाँमेंकोईदूसरानहीं
कितनीअजीबबातहैयेभीकिमैंउसे
वैसेतोचाहताहूँमगरचाहतानहीं
'मोहित'हरएकशख़्सहुआउसकीशक्लपर
औरशक्लपरहीरुकगयादिलतकगयानहीं
  - Mohit Dixit
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