ho agar bas men zaraa sa bhi to kar jaaun main | हो अगर बस में ज़रा सा भी तो कर जाऊँ मैं

  - Mohit Dixit
होअगरबसमेंज़रासाभीतोकरजाऊँमैं
उसकीगलियोंसेउठूँलौटकेघरजाऊँमैं
यारतूबातसमझदेखउसेऔरबता
ऐसेकैसेग़म-ए-हिज्राँसेउभरजाऊँमैं
उसकाचेहरामेरीआँखोंमेंदिखाहोगातुझे
बोलफिरकैसेमोहब्बतसेमुकरजाऊँमैं
वोबसइकबारबिनाबातनिहारेमुझको
औरइसबातपेइकउम्रठहरजाऊँमैं
एकजंगलहैजहाँझीलहैतुमभीशायद
बैठीमिलजाओकिनारेपेअगरजाऊँमैं
अपनेसीनेपेयेपत्थरअगरलेकेचलूँ
केजज़्बातमेंपन्नोंसाबिखरजाऊँमैं
एकतस्वीरबनानीहैमुझेजीतेजी
ऐसीतस्वीरजिसेदेखकेमरजाऊँमैं
सपनेआतेहैंबिछड़नेकेहीअक्सर'मोहित'
तुमजगादोगेअगरनींदमेंडरजाऊँमैं
  - Mohit Dixit
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