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Mohit Dixit
tumhein yaqeen nahin aayega lekin main sach kahtaa hooñ
tumhein yaqeen nahin aayega lekin main sach kahtaa hooñ | तुम्हें यक़ीन नहीं आएगा लेकिन मैं सच कहता हूँ
- Mohit Dixit
तुम्हें
यक़ीन
नहीं
आएगा
लेकिन
मैं
सच
कहता
हूँ
मैं
ने
उस
इंसान
को
देखा
भी
है
और
जिया
भी
है
- Mohit Dixit
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वो
बहुत
चालाक
है
लेकिन
अगर
हिम्मत
करें
पहला
पहला
झूट
है
उस
को
यक़ीं
आ
जाएगा
Zafar Iqbal
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मुझे
छोड़
दे
मेरे
हाल
पर
तिरा
क्या
भरोसा
है
चारा-गर
ये
तिरी
नवाज़िश-ए-मुख़्तसर
मेरा
दर्द
और
बढ़ा
न
दे
Shakeel Badayuni
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चाहिए
ख़ुद
पे
यक़ीन-ए-कामिल
हौसला
किस
का
बढ़ाता
है
कोई
Shakeel Badayuni
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बचपन
कितना
प्यारा
था
जब
दिल
को
यक़ीं
आ
जाता
था
मरते
हैं
तो
बन
जाते
हैं
आसमान
के
तारे
लोग
Azra Naqvi
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मैं
जब
सो
जाऊँ
इन
आँखों
पे
अपने
होंट
रख
देना
यक़ीं
आ
जाएगा
पलकों
तले
भी
दिल
धड़कता
है
Bashir Badr
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या
तेरे
अलावा
भी
किसी
शय
की
तलब
है
या
अपनी
मोहब्बत
पे
भरोसा
नहीं
हम
को
Shahryar
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शायद
मुझे
किसी
से
मोहब्बत
नहीं
हुई
लेकिन
यक़ीन
सब
को
दिलाता
रहा
हूँ
मैं
Jaun Elia
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मुझे
यक़ीं
है
ये
ज़हमत
नहीं
करेगा
कोई
बिना
गरज़
के
मोहब्बत
नहीं
करेगा
कोई
न
ख़ानदान
में
पहले
किसी
ने
इश्क़
किया
हमारे
बाद
भी
हिम्मत
नहीं
करेगा
कोई
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Asad Taskeen
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ऐ
मुझ
को
फ़रेब
देने
वाले
मैं
तुझ
पे
यक़ीन
कर
चुका
हूँ
Athar Nafees
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उसी
का
शहर
वही
मुद्दई
वही
मुंसिफ़
हमें
यक़ीं
था
हमारा
क़ुसूर
निकलेगा
Ameer Qazalbash
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इक
हुस्न-ए-बे-मिसाल
है
मेरी
निगाह
में
देखो
उस
ओर
मेरा
इशारा
है
उस
तरफ़
अब
नाव
अपनी
डूबने
वाली
है
साथियों
जो
तैर
सकते
हो
तो
किनारा
है
उस
तरफ़
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Mohit Dixit
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मेरा
दिल
किस
क़दर
बेचैन
है
उसको
बताओ
दोस्तों
मैं
दिन
भर
का
थका
हारा
हुआ
शब
छत
पे
भी
टहला
बहुत
Mohit Dixit
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सब्र
करिए
दिल
को
मेरे
सब्र
आने
पर
दास्तान-ए-इश्क़
का
हासिल
सुनाऊँगा
जंग
इक
ऐसी
कि
जिस
में
हारना
तय
था
मैं
लड़ा
ऐसे
कि
मानो
जीत
जाऊँगा
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Mohit Dixit
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कितनी
अजीब
बात
है
ये
भी
कि
मैं
उसे
वैसे
तो
चाहता
हूँ
मगर
चाहता
नहीं
Mohit Dixit
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तुझ
तक
आने
का
सफ़र
इतना
भी
आसाँ
तो
न
था
तूने
फेरी
है
नज़र
हम
सेे
जिस
आसानी
से
Mohit Dixit
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