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Mohit Dixit
ik husn-e-be-misaal hai meri nigaah men
ik husn-e-be-misaal hai meri nigaah men | इक हुस्न-ए-बे-मिसाल है मेरी निगाह में
- Mohit Dixit
इक
हुस्न-ए-बे-मिसाल
है
मेरी
निगाह
में
देखो
उस
ओर
मेरा
इशारा
है
उस
तरफ़
अब
नाव
अपनी
डूबने
वाली
है
साथियों
जो
तैर
सकते
हो
तो
किनारा
है
उस
तरफ़
- Mohit Dixit
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ज़माने
पहले
जिसे
डूबना
था
डूब
गया
न
जाने
अब
यहाँ
किसको
बचाने
आता
हूँ
Shariq Kaifi
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इतने
गहरे
उतर
गया
हूँ
दरिया-ए-दर्द-ए-दिल
में
हाथ
पकड़
कर
खींच
ले
वरना
डूब
के
भी
मर
सकता
हूँ
कट्टे
ख़ंजर
रस्सी
माचिस
कुछ
दिन
मुझ
सेे
दूर
रखो
कुछ
करने
से
चूक
गया
हूँ
मैं
कुछ
भी
कर
सकता
हूँ
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Vashu Pandey
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पुरानी
कश्ती
को
पार
लेकर
फ़क़त
हमारा
हुनर
गया
है
नए
खेवइये
कहीं
न
समझें
नदी
का
पानी
उतर
गया
है
Uday Pratap Singh
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मुहब्बत
आपसे
करना
कभी
आसाँ
नहीं
था
पर
बिना
कश्ती
के
दरिया
पार
करना
शौक़
है
मेरा
Tanoj Dadhich
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कभी
कभी
तो
ये
वहशत
भी
हम
पे
गुज़री
है
कि
दिल
के
साथ
ही
देखा
है
डूबना
शब
का
Abhishek shukla
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तूने
कहा
न
था
कि
मैं
कश्ती
पे
बोझ
हूँ
आँखों
को
अब
न
ढाँप
मुझे
डूबता
भी
देख
Shakeb Jalali
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बस
टूटी
कश्ती
ही
बतला
सकती
है
इक
दरिया
की
कितनी
शक्लें
होती
हैं
Soubhari Deepesh Sharma
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अपने
मन
में
डूब
कर
पा
जा
सुराग़-ए-ज़ि़ंदगी
तू
अगर
मेरा
नहीं
बनता
न
बन
अपना
तो
बन
Allama Iqbal
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हर
घड़ी
ख़ुद
से
उलझना
है
मुक़द्दर
मेरा
मैं
ही
कश्ती
हूँ
मुझी
में
है
समुंदर
मेरा
Nida Fazli
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मैं
कि
काग़ज़
की
एक
कश्ती
हूँ
पहली
बारिश
ही
आख़िरी
है
मुझे
Tehzeeb Hafi
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इस
कहानी
में
कहीं
नाम
हमारा
भी
तो
था
उस
सेे
कहना
कि
सिकन्दर
कभी
हारा
भी
तो
था
Mohit Dixit
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तुझ
तक
आने
का
सफ़र
इतना
भी
आसाँ
तो
न
था
तूने
फेरी
है
नज़र
हम
सेे
जिस
आसानी
से
Mohit Dixit
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ये
शहर
आम
सा
ही
शहर
है
बहिश्त
नहीं
बस
इक
अज़ीज़
रहा
करता
था
यहाँ
मेरा
Mohit Dixit
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मोहब्बत
हम
सेे
ऐसे
पेश
आती
है
हमें
नफ़रत
की
ज़द
में
छोड़
जाती
है
Mohit Dixit
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मैं
उसे
देखता
आया
हूँ
कई
बरसों
से
मेरी
आँखों
में
अभी
तक
वही
हैरत
क्यूँँ
है
उसके
मेयार
की
मुझ
में
कोई
भी
बात
नहीं
सोचता
हूँ
कि
उसे
मुझ
सेे
मोहब्बत
क्यूँँ
है
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Mohit Dixit
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