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Mohd Ashahad
insaan ke havas kii koii intiha nahin
insaan ke havas kii koii intiha nahin | इंसान के हवस की कोई इंतिहा नहीं
- Mohd Ashahad
इंसान
के
हवस
की
कोई
इंतिहा
नहीं
जन्नत
भी
चाहता
है
वो
हूरों
के
वास्ते
- Mohd Ashahad
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घर
में
झीने
रिश्ते
मैंने
लाखों
बार
उधड़ते
देखे
चुपके
चुपके
कर
देती
है
जाने
कब
तुरपाई
अम्मा
Aalok Shrivastav
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मिला
है
दुख
सदा
मुझको
मेरा
दुख
से
ये
नाता
है
मिरे
ख़ुद
घाव
में
मरहम
लगा
कर
दुख
सुलाता
है
Tiwari Jitendra
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हाथ
छूटें
भी
तो
रिश्ते
नहीं
छोड़ा
करते
वक़्त
की
शाख़
से
लम्हे
नहीं
तोड़ा
करते
Gulzar
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रिश्तों
की
दलदल
से
कैसे
निकलेंगे
हर
साज़िश
के
पीछे
अपने
निकलेंगे
Shakeel Jamali
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धूप
भी
आराम
करती
थी
जहाँ
अपना
ऐसी
छाँव
से
नाता
रहा
Madan Mohan Danish
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शायद
आ
जाए
कभी
देखने
वो
रश्क-ए-मसीह
मैं
किसी
और
से
इस
वास्ते
अच्छा
न
हुआ
Anwar Taban
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हम
मुहब्बत
में
किसी
के
वास्ते
जी
नहीं
सकते
तो
मर
तो
सकते
हैं
Sunny Seher
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टूटते
रिश्तों
से
बढ़कर
रंज
था
इस
बात
का
दरमियाँ
कुछ
दोस्त
थे,
और
दोस्त
भी
ऐसे,
के
बस
Renu Nayyar
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अंदर
की
दुनिया
से
रब्त
बढ़ाओ
'आनिस'
बाहर
खुलने
वाली
खिड़की
बंद
पड़ी
है
Aanis Moin
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इतना
धीरे-धीरे
रिश्ता
ख़त्म
हुआ
बहुत
दिनों
तक
लगा
नहीं
हम
बिछड़े
हैं
Ajmal Siddiqui
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मन
लगाना
है
हमें
अब
काम
में
कुछ
नहीं
रक्खा
नशा
ओ
जाम
में
ख़ुद
को
हम
कैसे
बना
लें
देवदास
कुफ़्र
है
मायूसी
जब
इस्लाम
में
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Mohd Ashahad
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बड़ी
उलझन
थी
जीवन
में
बहुत
गहरा
अँधेरा
था
तेरे
क़दमों
में
जब
सोया
बड़ा
दिलकश
सवेरा
था
मुझे
यूँँ
कामयाबी
की
ज़मानत
मिल
गई
घर
से
निकलते
वक़्त
मेरे
सर
पे
माँ
ने
हाथ
फेरा
था
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Mohd Ashahad
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सुनो
दिल
की
मेरी
धड़कन
मेरी
फ़रियाद
आ
जाओ
अभी
है
ठंड
का
मौसम
तुम
इसके
बाद
आ
जाओ
नहीं
लगता
है
मेरा
दिल
किसी
सूरत
किताबों
में
सुनो!
ऐसा
करो
अब
तुम
इलाहाबाद
आ
जाओ
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Mohd Ashahad
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कल
तलक
जो
दिल
में
था
वो
आज
सड़कों
पर
पड़ा
है
वो
फ़क़त
झण्डा
नहीं
अज़मत
है
मेरे
देश
की
Mohd Ashahad
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लोग
कहते
हैं
दिल
लगाई
की
यार
मैंने
तो
जग
हँसाई
की
एक
ही
शख़्स
मैंने
चाहा
था
और
उसने
भी
बे-वफ़ाई
की
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Mohd Ashahad
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