phir isi ummeed men har raat guzri hai | फिर इसी उम्मीद में हर रात गुज़री है

  - Ankur Mishra
फिरइसीउम्मीदमेंहररातगुज़रीहै
एकशबतोमेरीउसकेसाथगुज़रीहै
क्याहुआजोसाथमेरेचलपायावो
ख़ुशबूउसकीछूकेमेरेहाथगुज़रीहै
माॅंगतोलेताउसेमैंभीख़ुदासपर
सामनेसेउसकीकलबारातगुज़रीहै
एकअरसेसेथींनमआँखेंसनममेरी
मुद्दतोंकेबादयेबरसातगुज़रीहै
कबसेचुपहैंख़ामुशीओढ़ेयेलबअंकुर
जैसेतैसेआख़िरीवोरातगुज़रीहै
  - Ankur Mishra
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy