hi
0
Search
Shayari
Writers
Events
Blog
Store
Help
Login
By:
00:00/00:00
Ankur Mishra
kab kaha chaand taaron sa main
kab kaha chaand taaron sa main | कब कहा चाँद तारों सा मैं
- Ankur Mishra
कब
कहा
चाँद
तारों
सा
मैं
मुतमइन
हूँ
किनारों
सा
मैं
राब्ता
खिड़कियों
से
किया
तब
दिखा
फिर
दरारों
सा
मैं
दे
रहीं
थीं
सदाएँ
फ़ज़ा
उड़
रहा
था
ग़ुबारों
सा
मैं
बेसबब
लग
रहा
था
गले
ख़ुद
से
ही
बेसहारों
सा
मैं
टूट
जाऊँ
न
शाखों
से
फिर
बे-तकल्लुफ़
चनारों
सा
मैं
- Ankur Mishra
Download Ghazal Image
ख़ाली
कमरा
रौशनी
दीवार
से
मैं
भी
डरता
हूँ
फ़िराक़-ए-यार
से
बे-वफ़ा
कह
तो
दिया
सबने
मगर
हाल
कोई
पूछे
इस
बीमार
से
बोतलो
में
बंद
है
क़िस्मत
मिरी
रंज
है
मुझको
मिरी
तलवार
से
मुद्दतों
से
क़ैद
हूँ
मैं
ख़ुद
में
ही
लग
रही
है
चोट
क़ल्ब-ए-ज़ार
से
शौक़
था
जानाँ
कभी
मुझको
भी
पर
थक
गया
हूँ
अब
मैं
भी
इस
प्यार
से
Read Full
Ankur Mishra
Download Image
0 Likes
हाल-ए-दिल
कह
नहीं
सकते
साथ
तेरे
बह
नहीं
सकते
छोड़
दी
है
मय-कशी
हमने
तन्हा
हम
अब
रह
नहीं
सकते
बरसों
देखा
रस्ता
तेरा
पर
और
ज़िल्लत
सह
नहीं
सकते
कर
लिया
है
इश्क़
ख़ुद
से
अब
दूर
घर
से
रह
नहीं
सकते
Read Full
Ankur Mishra
Download Image
0 Likes
ख़्वाहिशों
की
सहर
देखते
हैं
हम
कहीं
भी
अगर
देखते
हैं
लोग
वाक़िफ
नहीं
तिश्नगी
से
और
उसकी
नज़र
देखते
हैं
इस
क़दर
ख़ौफ़
है
ज़िंदगी
का
मौत
को
सर-ब-सर
देखते
हैं
Read Full
Ankur Mishra
Download Image
0 Likes
क्या
कहें
कैसे
गुज़ारी
है
इक
बला
हमने
उतारी
है
छोड़
दो
तुम
हाथ
मेरा
अब
जंग
ख़ुद
से
मेरी
जारी
है
जाऊँ
लेकर
मैं
कहाँ
ख़ुद
को
मुझ
पे
मेरी
ही
उधारी
है
बरसों
से
सोया
नहीं
हूँ
मैं
आँखों
में
अब
भी
ख़ुमारी
है
कब
से
जो
देखा
नहीं
मैंने
शाम
इक
वो
प्यारी
प्यारी
है
Read Full
Ankur Mishra
Download Image
1 Like
मय-कदों
में
मय-कशी
से
प्यास
बढ़ती
है
नमी
से
जानता
हूँ
बे-ख़बर
है
आँख
तेरी
तिश्नगी
से
आदमी
हूँ
है
ख़ता
क्या
पूछना
है
ज़िंदगी
से
Read Full
Ankur Mishra
Download Image
0 Likes
Read More
Vishal Singh Tabish
Iftikhar Arif
Jaleel Manikpuri
Haseeb Soz
Abhishar Geeta Shukla
Ibn E Insha
Nazeer Banarasi
Muneer Niyazi
Iftikhar Naseem
Iqbal Ashhar
Get Shayari on your Whatsapp
Basant Shayari
Shadi Shayari
Khafa Shayari
Taareef Shayari
Anjam Shayari