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Ankur Mishra
ishq dariyaa sharaab dekha hai
ishq dariyaa sharaab dekha hai | इश्क़ दरिया शराब देखा है
- Ankur Mishra
इश्क़
दरिया
शराब
देखा
है
रात
भर
आफ़ताब
देखा
है
झूठ
कहते
हैं
लोग
सच
है
ये
उसने
मुड़
कर
जनाब
देखा
है
क्या
लगाऊँ
मैं
इसकी
क़ीमत
अब
ख़ुश्क
आँखों
में
ख़्वाब
देखा
है
भीगते
हसरतों
की
बारिश
में
मैंने
भी
इंतिख़ाब
देखा
है
शहर-दर-शहर
दोस्त
जाने
क्यूँ
आइने
पे
नक़ाब
देखा
है
- Ankur Mishra
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कोई
रहता
नहीं
फिर
भी
भरा
सा
ही
है
लगता
सच
तेरी
यादों
से
घर
अब
भी
हरा
सा
ही
है
लगता
सच
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Ankur Mishra
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ख़्वाहिशों
की
तमन्ना
नहीं
इस
यक़ीं
पे
भरोसा
नहीं
दूर
है
आसमाँ
पर
ज़मीं
आदमी
पाँव
रखता
नहीं
फाड़
दो
ख़त
ये
भी
आख़िरी
दर्द
इस
में
झलकता
नहीं
आइना
टूट
जाए
भी
तो
अक्स
सरकार
मिटता
नहीं
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Ankur Mishra
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इसलिए
कोई
ठहरा
नहीं
इश्क़
था
पर
भरोसा
नहीं
और
हैं
ख़्वाब
इन
आँखों
में
एक
तू
ही
अकेला
नहीं
छोड़
दूँ
जीना
कहते
हो
क्यूँ
ज़ख़्म
इतना
भी
गहरा
नहीं
एक
मुद्दत
से
सोया
हूँ
मैं
मौत
पे
कोई
पहरा
नहीं
ख़ामख़ाँ
जाँ
लुटा
दी
बशर
लौट
कर
कोई
आया
नहीं
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Ankur Mishra
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दर्द
को
दिल
के
सहारे
छोड़
जाता
है
दरमियाॅं
ख़ुद
को
हमारे
छोड़
जाता
है
हू-ब-हू
है
शख़्सियत
उस
सी
हमारी
जो
तख़्तियों
पे
रंग
सारे
छोड़
जाता
है
सोचते
हैं
देखकर
हर
शब
यही
अक्सर
कौन
रिंदों
को
किनारे
छोड़
जाता
है
आसमाॅं
से
नाप
लेता
हैं
ज़मीं
अपनी
गर्द
में
अंकुर
सितारे
छोड़
जाता
है
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मिलती
जुलती
वो
सूरत
नज़र
आती
है
हर
किसी
की
ज़रूरत
नज़र
आती
है
रुक
सी
जाती
हैं
नज़रें
उसी
पे
ही
बस
सादगी
की
वो
मूरत
नज़र
आती
है
कैसे
रोकूॅं
मैं
ख़ुद
को
फ़ना
होने
से
ये
मोहब्बत
कुदूरत
नज़र
आती
है
पास
मेरे
नहीं
कुछ
सिवा
मेरे
अब
उसकी
अब
फिर
ज़रूरत
नज़र
आती
है
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Ankur Mishra
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