ग़मवोअपनामैंअपनीज़बानीकहूँ
चाहतेहोमैंअश्कोंकोपानीकहूँ
छोड़जाताहैतन्हामुझेजिसतरह
सोचताहूँउसेमैंजवानीकहूँ
ज़िंदगीपूछतीहैपतामौतका
किसतरहख़ुद-कुशीकोकहानीकहूँ
शर्तख़ुदसेलगाहारजाताहूँमैं
चंदक़तरोंकोकैसेनिशानीकहूँ
हरदफ़ाजानजातीहैमेरीबशर
क्यूँनसाँसोंकोनुक़्स-ए-रवानीकहूँ