gham vo apna main apni zabaani kahooñ | ग़म वो अपना मैं अपनी ज़बानी कहूँ

  - Ankur Mishra
ग़मवोअपनामैंअपनीज़बानीकहूँ
चाहतेहोमैंअश्कोंकोपानीकहूँ
छोड़जाताहैतन्हामुझेजिसतरह
सोचताहूँउसेमैंजवानीकहूँ
ज़िंदगीपूछतीहैपतामौतका
किसतरहख़ुद-कुशीकोकहानीकहूँ
शर्तख़ुदसेलगाहारजाताहूँमैं
चंदक़तरोंकोकैसेनिशानीकहूँ
हरदफ़ाजानजातीहैमेरीबशर
क्यूँसाँसोंकोनुक़्स-ए-रवानीकहूँ
  - Ankur Mishra
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