zikr us paree-vash ka aur phir bayaañ apna | ज़िक्र उस परी-वश का और फिर बयाँ अपना

  - Mirza Ghalib
ज़िक्रउसपरी-वशकाऔरफिरबयाँअपना
बनगयारक़ीबआख़िरथाजोराज़-दाँअपना
मयवोक्यूँँबहुतपीतेबज़्म-ए-ग़ैरमेंयारब
आजहीहुआमंज़ूरउनकोइम्तिहाँअपना
मंज़रइकबुलंदीपरऔरहमबनासकते
अर्शसेउधरहोताकाशकेमकाँअपना
देवोजिसक़दरज़िल्लतहमहँसीमेंटालेंगे
बारेआश्नानिकलाउनकापासबाँअपना
दर्द-ए-दिललिखूँकबतकजाऊँउनकोदिखलादूँ
उँगलियाँफ़िगारअपनीख़ामाख़ूँ-चकाँअपना
घिसतेघिसतेमिटजाताआपनेअबसबदला
नंग-ए-सज्दासमेरेसंग-ए-आस्ताँअपना
ताकरेग़म्माज़ीकरलियाहैदुश्मनको
दोस्तकीशिकायतमेंहमनेहम-ज़बाँअपना
हमकहाँकेदानाथेकिसहुनरमेंयकताथे
बे-सबबहुआ'ग़ालिब'दुश्मनआसमाँअपना
  - Mirza Ghalib
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