taskin ko ham na royen jo zauq-e-nazar mile | तस्कीं को हम न रोएँ जो ज़ौक़-ए-नज़र मिले

  - Mirza Ghalib
तस्कींकोहमरोएँजोज़ौक़-ए-नज़रमिले
हूरान-ए-ख़ुल्दमेंतिरीसूरतमगरमिले
अपनीगलीमेंमुझकोकरदफ़्नबाद-ए-क़त्ल
मेरेपतेसेख़ल्क़कोक्यूँँतेराघरमिले
साक़ी-गरीकीशर्मकरोआजवर्नाहम
हरशबपियाहीकरतेहैंमयजिसक़दरमिले
तुझसेतोकुछकलामनहींलेकिननदीम
मेरासलामकहियोअगरनामा-बरमिले
तुमकोभीहमदिखाएँकिमजनूँनेक्याकिया
फ़ुर्सतकशाकश-ए-ग़म-ए-पिन्हाँसेगरमिले
लाज़िमनहींकिख़िज़्रकीहमपैरवीकरें
जानाकिइकबुज़ुर्गहमेंहम-सफ़रमिले
साकिनान-ए-कूचा-ए-दिलदारदेखना
तुमकोकहींजो'ग़ालिब'-ए-आशुफ़्ता-सरमिले
  - Mirza Ghalib
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