luun waam bakht-e-khufta se yak-khwaab-e-khush wale | लूँ वाम बख़्त-ए-ख़ुफ़्ता से यक-ख़्वाब-ए-खुश वले

  - Mirza Ghalib
लूँवामबख़्त-ए-ख़ुफ़्तासेयक-ख़्वाब-ए-खुशवले
'ग़ालिब'येख़ौफ़हैकिकहाँसेअदाकरूँँ
ख़ुशवहशतेकिअर्ज़-ए-जुनून-ए-फ़नाकरूँँ
जूँगर्द-ए-राहजामा-ए-हस्तीक़बाकरूँँ
बहार-ए-नाज़कितेरेख़िरामसे
दस्तारगिर्द-ए-शाख़-ए-गुल-ए-नक़्श-ए-पाकरूँँ
ख़ुशउफ़्तादगीकिब-सहरा-ए-इन्तिज़ार
जूँजादागर्द-ए-रहसेनिगहसुर्मा-साकरूँँ
सब्रऔरयेअदाकिदिलआवेअसीर-ए-चाक
दर्दऔरयेकमींकिरह-ए-नालावाकरूँँ
वोबे-दिमाग़-ए-मिन्नत-ए-इक़बालहूँकिमैं
वहशतब-दाग़-ए-साया-ए-बाल-ए-हुमाकरूँँ
वोइल्तिमास-ए-लज्ज़त-ए-बे-दादहूँकिमैं
तेग़-ए-सितमकोपुश्त-ए-ख़म-ए-इल्तिजाकरूँँ
वोराज़-ए-नालाहूँकिब-शरह-ए-निगाह-ए-अज्ज़
अफ़्शाँग़ुबार-ए-सुर्मासेफ़र्द-ए-सदाकरूँँ
  - Mirza Ghalib
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