safaa-e-hairat-e-aaina hai samaan-e-zang aaKHir | सफ़ा-ए-हैरत-ए-आईना है सामान-ए-ज़ंग आख़िर

  - Mirza Ghalib
सफ़ा-ए-हैरत-ए-आईनाहैसामान-ए-ज़ंगआख़िर
तग़य्युरआब-ए-बर-जा-मांदाकापाताहैरंगआख़िर
कीसामान-ए-ऐश-ओ-जाहनेतदबीरवहशतकी
हुआजाम-ए-ज़मुर्रदभीमुझेदाग़-ए-पलंगआख़िर
ख़त-ए-नौ-ख़ेज़नील-ए-चश्मज़ख़्म-ए-साफ़ी-ए-आरिज़
लियाआईनानेहिर्ज़-ए-पर-ए-तूतीब-चंगआख़िर
हिलाल-आसातहीरहगरकुशादन-हा-ए-दिलचाहे
हुआमहकसरत-ए-सरमाया-अंदाेज़ीसेतंगआख़िर
तड़पकरमरगयावोसैद-ए-बाल-अफ़्शाँकिमुज़्तरथा
हुआनासूर-ए-चश्म-ए-ताज़ियतचश्म-ए-ख़दंगआख़िर
लिखीयारोंकीबद-मस्तीनेमयख़ानेकीपामाली
हुइक़तरा-फ़िशानी-हा-ए-मय-बारान-ए-संगआख़िर
'असद'पर्देमेंभीआहंग-ए-शौक़-ए-यारक़ाएमहै
नहींहैनग़्मेंसेख़ालीख़मीदन-हा-ए-चंगआख़िर
  - Mirza Ghalib
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