qatra-e-may bas-ki hairat se nafs-parvar hua | क़तरा-ए-मय बस-कि हैरत से नफ़स-परवर हुआ

  - Mirza Ghalib
क़तरा-ए-मयबस-किहैरतसेनफ़स-परवरहुआ
ख़त्त-ए-जाम-ए-मैसरासररिश्ता-ए-गौहरहुआ
ए'तिबार-ए-इश्क़कीख़ाना-ख़राबीदेखना
ग़ैरनेकीआहलेकिनवोख़फ़ामुझपरहुआ
गरमी-ए-दौलतहुइआतिश-ज़न-ए-नाम-ए-निको
ख़ाना-ए-ख़ातिममेंयाक़ूत-ए-नगींअख़्तरहुआ
नश्शामेंगुम-कर्दा-राहआयावोमस्त-ए-फ़ित्ना-ख़ू
आजरंग-रफ़्तादौर-ए-गर्दिश-ए-साग़रहुआ
दर्दसेदर-पर्दादीमिज़्गाँ-सियाहाँनेशिकस्त
रेज़ारेज़ाउस्तुख़्वाँकापोस्तमेंनश्तरहुआ
ज़ोहदगरदीदनहैगर्द-ए-ख़ाना-हा-ए-मुनइमाँ
दाना-ए-तस्बीहसेमैंमोहरा-दर-शश्दरहुआ
ब-ज़ब्त-ए-हाल-ए-ना-अफ़्सुर्दागाँजोश-ए-जुनूँ
नश्शा-ए-मयहैअगरयक-पर्दानाज़ुक-तरहुआ
इसचमनमेंरेशा-दारीजिसनेसरखेंचा'असद'
तरज़बान-ए-लुत्फ़-ए-आम-ए-साक़ी-ए-कौसरहुआ
  - Mirza Ghalib
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