phir kuchh ik dil ko be-qaraari hai | फिर कुछ इक दिल को बे-क़रारी है

  - Mirza Ghalib
फिरकुछइकदिलकोबे-क़रारीहै
सीनाजुया-ए-ज़ख़्म-ए-कारीहै
फिरजिगरखोदनेलगानाख़ुन
आमद-ए-फ़स्ल-ए-लाला-कारीहै
क़िब्ला-ए-मक़्सद-ए-निगाह-ए-नियाज़
फिरवहीपर्दा-ए-अमारीहै
चश्मदल्लाल-ए-जिंस-ए-रुस्वाई
दिलख़रीदार-ए-ज़ौक़-ए-ख़्वारीहै
वहीसद-रंगनाला-फ़रसाई
वहीसद-गोनाअश्क-बारीहै
दिलहवा-ए-ख़िराम-ए-नाज़सेफिर
महशरिस्तान-ए-सितान-ए-बेक़रारीहै
जल्वाफिरअर्ज़-ए-नाज़करताहै
रोज़बाज़ार-ए-जाँ-सिपारीहै
फिरउसीबे-वफ़ापेमरतेहैं
फिरवहीज़िंदगीहमारीहै
फिरखुलाहैदर-ए-अदालत-ए-नाज़
गर्म-बाज़ार-ए-फ़ौजदारीहै
होरहाहैजहानमेंअंधेर
ज़ुल्फ़कीफिरसिरिश्ता-दारीहै
फिरदियापारा-ए-जिगरनेसवाल
एकफ़रियादआह-ओ-ज़ारीहै
फिरहुएहैंगवाह-ए-इश्क़तलब
अश्क-बारीकाहुक्म-जारीहै
दिलमिज़्गाँकाजोमुक़द्दमाथा
आजफिरउसकीरू-बकारीहै
बे-ख़ुदीबे-सबबनहीं'ग़ालिब'
कुछतोहैजिसकीपर्दा-दारीहै
  - Mirza Ghalib
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