nuqta-cheen hai gham-e-dil us ko sun | नुक्ता-चीं है ग़म-ए-दिल उस को सुनाए न बने

  - Mirza Ghalib
नुक्ता-चींहैग़म-ए-दिलउसकोसुनाएबने
क्याबनेबातजहाँबातबनाएबने
मैंबुलातातोहूँउसकोमगरजज़्बा-ए-दिल
उसपेबनजाएकुछऐसीकिबिनआएबने
खेलसमझाहैकहींछोड़देभूलजाए
काशयूँँभीहोकिबिनमेरेसताएबने
ग़ैरफिरताहैलिएयूँँतिरेख़तकोकिअगर
कोईपूछेकियेक्याहैतोछुपाएबने
इसनज़ाकतकाबुराहोवोभलेहैंतोक्या
हाथआवेंतोउन्हेंहाथलगाएबने
कहसकेकौनकियेजल्वागरीकिसकीहै
पर्दाछोड़ाहैवोउसनेकिउठाएबने
मौतकीराहदेखूँकिबिनआएरहे
तुमकोचाहूँकिआओतोबुलाएबने
बोझवोसरसेगिराहैकिउठाएउठे
कामवोआनपड़ाहैकिबनाएबने
इश्क़परज़ोरनहींहैयेवोआतिश'ग़ालिब'
किलगाएलगेऔरबुझाएबने
  - Mirza Ghalib
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