dhota hooñ jab main peene ko us seem-tan ke paanv | धोता हूँ जब मैं पीने को उस सीम-तन के पाँव

  - Mirza Ghalib
धोताहूँजबमैंपीनेकोउससीम-तनकेपाँव
रखताहैज़िदसेखींचकेबाहरलगनकेपाँव
दीसादगीसेजानपड़ूँकोहकनकेपाँव
हैहातक्यूँँटूटगएपीर-ज़नकेपाँव
भागेथेहमबहुतसोउसीकीसज़ाहैये
होकरअसीरदाबतेहैंराहज़नकेपाँव
मरहमकीजुस्तुजूमेंफिराहूँजोदूरदूर
तनसेसिवाफ़िगारहैंइसख़स्ता-तनकेपाँव
अल्लाह-रेज़ौक़-ए-दश्त-नवर्दीकिबा'द-ए-मर्ग
हिलतेहैंख़ुद-ब-ख़ुदमिरेअंदरकफ़नकेपाँव
हैजोश-ए-गुलबहारमेंयाँतककिहरतरफ़
उड़तेहुएउलझतेहैंमुर्ग़-ए-चमनकेपाँव
शबकोकिसीकेख़्वाबमेंआयाहोकहीं
दुखतेहैंआजउसबुत-ए-नाज़ुक-बदनकेपाँव
'ग़ालिब'मिरेकलाममेंक्यूँँकरमज़ाहो
पीताहूँधोकेख़ुसरव-ए-शीरीं-सुख़नकेपाँव
  - Mirza Ghalib
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