barshikaal-e-giryaa-e-aashiq hai dekha chahiye | बर्शिकाल-ए-गिर्या-ए-आशिक़ है देखा चाहिए

  - Mirza Ghalib
बर्शिकाल-ए-गिर्या-ए-आशिक़हैदेखाचाहिए
खिलगईमानिंद-ए-गुलसौजासेदीवार-ए-चमन
उल्फ़त-ए-गुलसेग़लतहैदावा-ए-वारस्तगी
सर्वहैबा-वस्फ़-ए-आज़ादीगिरफ़्तार-ए-चमन
साफ़हैअज़बस-किअक्स-ए-गुलसेगुलज़ार-ए-चमन
जानशीन-ए-जौहर-ए-आईनाहैख़ार-ए-चमन
हैनज़ाकतबसकिफ़स्ल-ए-गुलमेंमेमार-ए-चमन
क़ालिब-ए-गुलमेंढलीहैख़िश्त-ए-दीवार-ए-चमन
तेरीआराइशकाइस्तिक़बालकरतीहैबहार
जौहर-ए-आईनाहैयाँनक़्श-ए-एहज़ार-ए-चमन
बसकिपाईयारकीरंगीं-अदाईसेशिकस्त
हैकुलाह-ए-नाज़-ए-गुलबरताक़-ए-दीवार-ए-चमन
वक़्तहैगरबुलबुल-ए-मिस्कींज़ुलेख़ाईकरे
यूसुफ़-ए-गुलजल्वा-फ़रमाहैब-बाज़ार-ए-चमन
वहशत-अफ़्ज़ागिर्या-हामौक़ूफ़-ए-फ़स्ल-ए-गुल'असद'
चश्म-ए-दरिया-रेज़हैमीज़ाब-ए-सरकार-ए-चमन
  - Mirza Ghalib
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