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Moni Gopal Tapish
raat phir aankhoñ ki dharti der tak jaltee rahi
raat phir aankhoñ ki dharti der tak jaltee rahi | रात फिर आँखों की धरती देर तक जलती रही
- Moni Gopal Tapish
रात
फिर
आँखों
की
धरती
देर
तक
जलती
रही
देर
तक
अश्कों
का
सावन
टूट
कर
बरसा
किया
- Moni Gopal Tapish
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जब
चली
ठंडी
हवा
बच्चा
ठिठुर
कर
रह
गया
माँ
ने
अपने
ला'ल
की
तख़्ती
जला
दी
रात
को
Sibt Ali Saba
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सखी
को
हमारी
नज़र
लग
न
जाए
उसे
ख़्वाब
में
रात
भर
देखते
हैं
Sahil Verma
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सियाह
रात
नहीं
लेती
नाम
ढलने
का
यही
तो
वक़्त
है
सूरज
तिरे
निकलने
का
Shahryar
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हमारी
याद
आने
पर
अकेली
रात
में
तुम
भी
कभी
पंखा
कभी
टीवी
कभी
दीवार
देखोगे
Ambar
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रात
सोने
के
लिए
दिन
काम
करने
के
लिए
वक़्त
मिलता
ही
नहीं
आराम
करने
के
लिए
Jamal Ehsani
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यहाँ
पे
कल
की
रात
सर्द
थी
हर
एक
रोज़
से
सो
रात
भर
बुझा
नहीं
तुम्हारी
याद
का
अलाव
Siddharth Saaz
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ये
कहाँ
की
रीत
है
जागे
कोई
सोए
कोई
रात
सब
की
है
तो
सब
को
नींद
आनी
चाहिए
Madan Mohan Danish
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है
किसी
जालिम
उदू
की
घात
दरवाज़े
में
है
या
मसाफ़त
है
नई
या
रात
दरवाज़े
में
है
जिस
तरहा
उठती
है
नजरें
बे-इरादा
बार-बार
साफ़
लगता
है
के
कोई
बात
दरवाजे
में
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Farhat Abbas Shah
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आज
की
रात
दिवाली
है
दिए
रौशन
हैं
आज
की
रात
ये
लगता
है
मैं
सो
सकता
हूँ
Azm Shakri
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उसे
यूँँ
चेहरा-चेहरा
ढूँढता
हूँ
वो
जैसे
रात-दिन
सड़कों
पे
होगा
Shariq Kaifi
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कुछ
पल
हमने
साथ
बिताए
एक
डगर
पर
ये
क़िस्सा
दरियाओं
को
तुग़्यानी
देगा
हम
महफ़िल
महफ़िल
सजने
वाले
मौसम
हैं
कौन
बता
ऐ
तपिश
हमें
वीरानी
देगा
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Moni Gopal Tapish
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अपने
ही
ख़ून
में
ये
जिस्म
नहाएा
अक्सर
मैंने
हिस्सा
कभी
माँगा
नहीं
पाया
अक्सर
लोग
लफ़्ज़ों
को
भी
जागीर
समझ
लेते
हैं
मैंने
लहजा
भी
बनाया
तो
मिटाया
अक्सर
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Moni Gopal Tapish
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सिलसिला
ये
है
कि
अब
वो
भी
ख़फ़ा
रहने
लगा
ख़्वाब
रूठा
मेरी
आँखों
से
जुदा
रहने
लगा
मेरे
एहसास
की
चाँदी
की
चमक
मद्धम
है
जब
से
आपे
में
मुहब्बत
का
ख़ुदा
रहने
लगा
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Moni Gopal Tapish
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एक
ग़ज़ल
फिर
कहना
चाहूँ
तेरे-मेरे
प्यार
के
नाम
आधा
तेरी
जीत
का
क़िस्सा
आधा
मेरी
हार
के
नाम
इश्क़
मुहब्बत
के
अफ़साने,रांझा
,मजनूँ
या
फ़रहाद
सब
गुल
बूटे
ख़ुशबू
वाले
लेकिन
हैं
तलवार
के
नाम
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Moni Gopal Tapish
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ऐसे
खंडहर
को
कौन
देखे
है
घर
से
निकलो
तो
सज
सँवर
के
चलो
Moni Gopal Tapish
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