qayamat hain ye chaspaan jaa | क़यामत हैं ये चस्पाँ जा

  - Meer Taqi Meer
क़यामतहैंयेचस्पाँजा
मेंवाले
गुलोंनेजिनकीख़ातिरख़िरक़ेडाले
वोकालाचोरहैख़ाल-ए-रुख़-ए-यार
किसौआँखोंमेंदिलहोतोचुराले
नहींउठतादिल-ए-महज़ूँकामातम
ख़ुदाहीइसमुसीबतसेनिकाले
कहाँतकदूरबैठेबैठेकहिए
कभूतोपासहमकोभीबुलाले
दिलाबाज़ीकरउनगेसुओंसे
नहींआसाँखिलानेसाँपकाले
तपिशनेदिलजिगरकीमारडाला
बग़लमेंदुश्मनअपनेहमनेपाले
महकेबू-ए-गुलकाशयक-चंद
अभीज़ख़्म-ए-जिगरसारेहैंआले
किसेक़ैद-ए-क़फ़समेंयादगुलकी
पड़ेहैंअबतोजीनेहीकेलाले
सताया'मीर'ग़म-कशकोकिन्होंने
किफिरअबअर्शतकजातेहैंनाले
  - Meer Taqi Meer
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy