paa.e khitaab kya kya dekhe i'taab kya kya | पाए ख़िताब क्या क्या देखे इ'ताब क्या क्या

  - Meer Taqi Meer
पाएख़िताबक्याक्यादेखेइ'ताबक्याक्या
दिलकोलगाकेहमनेखींचेअज़ाबक्याक्या
काटेहैंख़ाकउड़ाकरजोंगर्द-बादबरसों
गलियोंमेंहमहुएहैंउसबिनख़राबक्याक्या
कुछगुलसेहैंशगुफ़्ताकुछसर्वसेहैंक़द-कश
उसकेख़यालमेंहमदेखेहैंख़्वाबक्याक्या
अन्वा-ए-जुर्ममेरेफिरबे-शुमार-ओ-बे-हद
रोज़-ए-हिसाबलेंगेमुझसेहिसाबक्याक्या
इकआगलगरहीहैसीनोंमेंकुछपूछो
जलजलकेहमहुएहैंउसबिनकबाबक्याक्या
इफ़रात-ए-शौक़मेंतोरूयतरहीमुतलक़
कहतेहैंमेरेमुँहपरअबशैख़-ओ-शाबक्याक्या
फिरफिरगयाहैकरमुँहतकजिगरहमारे
गुज़रेहैंजान-ओ-दिलपरयाँइज़्तिराबक्याक्या
आशुफ़्ताउसकेगेसूजबसेहुएहैंमुँहपर
तबसेहमारेदिलकोहैपेच-ओ-ताबक्याक्या
कुछसूझतानहींहैमस्तीमें'मीर'-जीको
करतेहैंपोच-गोईपीकरशराबक्याक्या
  - Meer Taqi Meer
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