dil ke maamure ki mat kar fikr furqat chahiye | दिल के मामूरे की मत कर फ़िक्र फ़ुर्सत चाहिए

  - Meer Taqi Meer
दिलकेमामूरेकीमतकरफ़िक्रफ़ुर्सतचाहिए
ऐसेवीरानेकेअबबसनेकोमुद्दतचाहिए
इशक़-ओ-मय-ख़्वारीनिभेहैकोईदरवेशीकेबीच
इसतरहकेख़र्ज-ए-ला-हासिलकोदौलतचाहिए
आक़िबतफ़रहादमरकरकामअपनाकरगया
आदमीहोवेकिसीपेशेमेंजुरअतचाहिए
होतरफ़मुझपहलवाँशायरकाकबआजिज़सुख़न
सामनेहोनेकोसाहबफ़नकेक़ुदरतचाहिए
इश्क़मेंवस्ल-ओ-जुदाईसेनहींकुछगुफ़्तुगू
क़ुरब-ओ-बादउसजाबराबरहैमोहब्बतचाहिए
नाज़ुकीकोइश्क़मेंक्यादख़्लहैबुल-हवस
याँसऊबतखींचनेकोजीमेंताक़तचाहिए
तंगमतहोइब्तिदा-ए-आशिक़ीमेंइसक़दर
ख़ैरियतहै'मीर'साहिब-ए-दिलसलामतचाहिए
  - Meer Taqi Meer
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy