na gaya khayaal-e-zulf-e-siyah jafa-shaaraanna hua ki subh hove shab-e-teera rozgaaraan | न गया ख़याल-ए-ज़ुल्फ़-ए-सियह जफ़ा-शआराँ

  - Meer Taqi Meer
गयाख़याल-ए-ज़ुल्फ़-ए-सियहजफ़ा-शआराँ
हुआकिसुब्हहोवेशब-ए-तीरारोज़गाराँ
कहाथारफ़ूगरतिरेटाँकेहोंगेढीले
सियागयायेआख़िरदिल-ए-चाक-ए-बे-क़राराँ
हुईईदसबनेपहनेतरब-ओ-ख़ुशीकेजा
में
हुआकिहमभीबदलेंयेलिबास-ए-सोगवाराँ
ख़तरअज़ीममेंहैंमिरीआह-ओ-अश्कसेसब
किजहानरहचुकाफिरजोयहीहैबाद-ओ-बाराँ
कहींख़ाक-ए-कूकोउसकीतूसबादीजोजुम्बिश
किभरेहैंइसज़मींमेंजिगरजिगर-फ़िगाराँ
रखेताज-ए-ज़रकोसरपरचमनज़मानामेंगिल
शगुफ़्ताहोतूइतनाकिख़िज़ाँहैयेबहाराँ
नहींतुझकोचश्म-ए-इबरतयेनुमूदमेंहैवर्ना
किगएहैंख़ाकमेंमिलकईतुझसेताज-दाराँ
तूजहाँसेदिलउठायाँनहींरस्म-ए-दर्दमंदी
किसीनेभीयूँँपूछाहुएख़ाकयाँहज़ाराँ
येअजलसेजीछुपानामिराआश्कारहैगा
किख़राबहोगामुझबिनग़म-ए-इश्क़गुल-अज़ाराँ
येसुनाथा'मीर'हमनेकिफ़सानाख़्वाबलाहै
तिरीसर-गुज़श्तसुनकरगएऔरख़्वाबयाराँ
  - Meer Taqi Meer
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