kya bulbul aseer hai be-baal-o-par ki ham | क्या बुलबुल असीर है बे-बाल-ओ-पर कि हम

  - Meer Taqi Meer
क्याबुलबुलअसीरहैबे-बाल-ओ-परकिहम
गुलकबरखेहैटुकड़ेजिगरइसक़दरकिहम
ख़ुर्शीदसुब्हनिकलेहैइसनूरसेकितो
शबनमगिरहमेंरखतीहैयेचश्म-ए-तरकिहम
जीतेहैंतोदिखादेंगेदावा-ए-अंदलीब
गुलबिनख़िज़ाँमेंअबकेवोरहतीहैमरकिहम
येतेग़हैयेतश्तहैयेहमहैंकुश्तनी
खेलेहैकौनऐसीतरहजानपरकिहम
तलवारेंतुमलगातेहोहमहैंगेदम-ब-ख़ुद
दुनियामेंयेकरेहैकोईदरगुज़रकिहम
इसजुस्तुजूमेंऔरख़राबीतोक्याकहें
इतनीनहींहुईहैसबादर-ब-दरकिहम
जबजाफँसाकहींतोहमेंयाँहुईख़बर
रखताहैकौनदिलतिरीइतनीख़बरकिहम
जीतेहैंऔररोतेहैंलख़्त-ए-जिगरहै'मीर'
करतेसुनाहैयूँँकोईक़ीमाजिगरकिहम
  - Meer Taqi Meer
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