koi hua na roo-kush tak meri chashm-e-tar se | कोई हुआ न रू-कश टक मेरी चश्म-ए-तर से

  - Meer Taqi Meer
कोईहुआरू-कशटकमेरीचश्म-ए-तरसे
क्याक्याअब्रकरयाँज़ोरज़ोरबरसे
वहशतसेमेरीयारोख़ातिरजम्अ''रखियो
फिरआवेयाआवेनौपुरउठाजोघरसे
अबजूँसरिश्कउनसेफिरनेकीचश्ममतरख
जोख़ाकमेंमिलेहैंगिरकरतिरीनज़रसे
दीदारख़्वाहउसकेकमहोंतोशोरकमहो
हरसुब्हइकक़यामतउठतीहैउसकेदरसे
दाग़एकहोजिलाभीख़ूँएकहोबहाभी
अबबहसक्याहैदिलसेक्यागुफ़्तुगूजिगरसे
दिलकिसतरहखींचेंअशआ'ररेख़्तेके
बेहतरक्याहैमैंनेउसऐबकोहुनरसे
अंजाम-ए-कारबुलबुलदेखाहमअपनीआँखों
आवाराथेचमनमेंदोचारटूटेपरसे
बे-ताक़तीनेदिलकीआख़िरकोमाररखा
आफ़तहमारेजीकीआईहमारेघरसे
दिलकशयेमंज़िलआख़िरदेखातोआहनिकली
सबयारजाचुकेथेआएजोहमसफ़रसे
आवारा'मीर'शायदवाँख़ाकहोगयाहै
यकगर्दउठचलेहैगाहउसकीरहगुज़रसे
  - Meer Taqi Meer
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy