kiya main ne ro kar fishaar-e-garebaan | किया मैं ने रो कर फ़िशार-ए-गरेबाँ

  - Meer Taqi Meer
कियामैंनेरोकरफ़िशार-ए-गरेबाँ
रग-ए-अब्रथातार-तार-ए-गरेबाँ
कहींदस्त-ए-चालाकनाख़ुनलागे
किसीनाहैक़ुर्ब-ओ-जवार-ए-गरेबाँ
निशाँअश्क-ए-ख़ूनींकेउड़तेचलेहैं
ख़िज़ाँहोचलीहैबहार-ए-गरेबाँ
जुनूँतेरीमिन्नतहैमुझपरकितूने
रक्खामिरेसरपेबार-ए-गरेबाँ
ज़ियारतकरूँँदिलसेख़स्ता-जिगरकी
कहाँहोगीयारबमज़ार-ए-गरेबाँ
कहींजाएयेदौर-ए-दामनभीजल्दी
किआख़िरहुआरोज़गार-ए-गरेबाँ
फिरूँ'मीर'उर्यांदामनकाग़महो
बाक़ीरहेख़ार-ख़ार-ए-गरेबाँ
  - Meer Taqi Meer
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy