kahaan tak gair jaasoosi ke lene ko laga aave | कहाँ तक ग़ैर जासूसी के लेने को लगा आवे

  - Meer Taqi Meer
कहाँतकग़ैरजासूसीकेलेनेकोलगाआवे
इलाहीइसबला-ए-ना-गहाँपरभीबलाआवे
रुकाजाताहैजीअंदरहीअंदरआजगर्मीसे
बलासेचाकहीहोजावेसीनाटुकहवाआवे
तिराआनाहीअबमरकूज़हैहमकोदम-ए-आख़िर
येजीसदक़ेकियाथाफिरआवेतनमेंयाआवे
येरस्म-ए-आमद-ओ-रफ़्त-ए-दयार-ए-इश्क़ताज़ाहै
हँसीवोजाएमेरीऔररोनायूँँचलाआवे
असीरीनेचमनसेमेरीदिल-गर्मीकोधोडाला
वगर्नाबर्क़जाकरआशियाँमेराजलाआवे
उमीद-ए-रहमउनसेसख़्तना-फ़हमीहै'आशिक़की
येबुतसंगीं-दिलीअपनीछोड़ेंगरख़ुदाआवे
येफ़न्न-ए-इश्क़हैआवेउसेतीनतमेंजिसकीहो
तूज़ाहिद-ए-पीर-ए-ना-बालिग़हैबेतहतुझकोक्याआवे
हमारेदिलमेंआनेसेतकल्लुफ़ग़मकोबेजाहै
येदौलत-ख़ानाहैउसकावोजबचाहेचलाआवे
ब-रंग‌‌‌‌-ए-बू-ए-ग़ुंचाउम्रइकहीरंगमेंगुज़रे
मुयस्सर'मीर'-साहिबगरदिलबे-मुद्दआआवे
  - Meer Taqi Meer
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