hai ghazal meer ye shifaai ki | है ग़ज़ल 'मीर' ये 'शिफ़ाई' की

  - Meer Taqi Meer
हैग़ज़ल'मीर'ये'शिफ़ाई'की
हमनेभीतब्अ-आज़माईकी
उसकेईफ़ा-ए-अहदतकजिए
उम्रनेहमसेबे-वफ़ाईकी
वस्लकेदिनकीआरज़ूहीरही
शबआख़िरहुईजुदाईकी
इसीतक़रीबउसगलीमेंरहे
मिन्नतेंहैंशिकस्ता-पाईकी
दिलमेंउसशोख़केकीतासीर
आहनेआहना-रसाईकी
कासा-ए-चश्मलेकेजूँनर्गिस
हमनेदीदारकीगदाईकी
ज़ोरज़रकुछथातोबार-ए-'मीर'
किसभरोसेपरआशनाईकी
  - Meer Taqi Meer
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