guzar jaan se aur dar kuchh nahin | गुज़र जान से और डर कुछ नहीं

  - Meer Taqi Meer
गुज़रजानसेऔरडरकुछनहीं
रह-ए-इश्क़मेंफिरख़तरकुछनहीं
हैअबकामदिलजिसपेमौक़ूफ़तो
वोनालाकिजिसमेंअसरकुछनहीं
हुआमाइलउससर्वकादिलमिरा
ब-जुज़जौरजिससेसमरकुछनहीं
करअपनेमहवोंकाहरगिज़सुराग़
गएगुज़रेबसअबख़बरकुछनहीं
तिरीहोचुकीख़ुश्कमिज़्गाँकीसब
लहूअबजिगरमेंमगरकुछनहीं
हयासेनहींपुश्त-ए-पापरवोचश्म
मिराहालमद्द-ए-नज़रकुछनहीं
करूँँक्यूँँकेइंकारइश्क़आहमें
येरोनाभलाक्याहैगरकुछनहीं
कमरउसकीरश्करग-ए-जाँहै'मीर'
ग़रज़इससेबारीक-तरकुछनहीं
  - Meer Taqi Meer
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