dil-o-dimaagh hai ab kis ko zindagaani ka | दिल-ओ-दिमाग़ है अब किस को ज़िंदगानी का

  - Meer Taqi Meer
दिल-ओ-दिमाग़हैअबकिसकोज़िंदगानीका
जोकोईदमहैतोअफ़्सोसहैजवानीका
अगरचेउम्रकेदसदिनयेलबरहेख़ामोश
सुख़नरहेगासदामेरीकम-ज़बानीका
सुबुकहैआवेजोमिंदीलरखनमाज़कोशैख़
रहाहैकौनसाअबवक़्तसरगिरानीका
हज़ारजानसेक़ुर्बानबे-परीकेहैं
ख़यालभीकभूगुज़रापर-फ़िशानीका
फिरेहैखींचेहीतलवारमुझपेहर-दमतो
किसैदहूँमैंतिरीदुश्मनीजानीका
नुमूदकरकेवहींबहर-ए-ग़ममेंबैठगया
कहेतो'मीर'भीइकबुलबुलाथापानीका
  - Meer Taqi Meer
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