jins-e-giraan ko tujh se jo log chahte hain | जिंस-ए-गिराँ को तुझ से जो लोग चाहते हैं

  - Meer Taqi Meer
जिंस-ए-गिराँकोतुझसेजोलोगचाहतेहैं
वेरोगअपनेजीकोनाहक़बसाहतेहैं
उसमय-कदेमेंहमभीमुद्दतसेहैंव-लेकिन
ख़म्याज़ाखींचतेहैंहरदमजमाहतेहैं
नामूसदोस्तीसेगर्दनबंधीहैअपनी
जीतेहैंजबतलकहमतबतकनिबाहतेहैं
सहलइसक़दरनहींहैमुश्किल-पसंदीमेरी
जोतुझकोदेखतेहैंमुझकोसराहतेहैं
वेदिनगएकिरातेंनालोंसेकाटतेथे
बे-डोल'मीर'-साहिबअबकुछकराहतेहैं
  - Meer Taqi Meer
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