chhutta hi nahin ho jise azaar-e-mohabbat | छुटता ही नहीं हो जिसे आज़ार-ए-मोहब्बत

  - Meer Taqi Meer
छुटताहीनहींहोजिसेआज़ार-ए-मोहब्बत
मायूसहूँमैंभीकिहूँबीमार-ए-मोहब्बत
इम्काँनहींजीते-जीहोइसक़ैदसेआज़ाद
मरजाएतभीछूटेगिरफ़्तार-ए-मोहब्बत
तक़्सीरख़ूबाँकीजल्लादकाकुछजुर्म
थादुश्मन-ए-जानीमिराइक़रार-ए-मोहब्बत
हरजिंसकेख़्वाहाँमिलेबाज़ार-ए-जहाँमें
लेकिनमिलाकोईख़रीदार-ए-मोहब्बत
इसराज़कोरखजीहीमेंताजीबचेतेरा
ज़िन्हारजोकरताहोतूइज़हार-ए-मोहब्बत
हरनक़्श-ए-क़दमपरतिरेसरबेचेहैं'आशिक़
टुकसैरतोकरआजतूबाज़ार-ए-मोहब्बत
कुछमस्तहैंहमदीदा-ए-पुर-ख़ून-ए-जिगरसे
आयायहीहैसाग़र-ए-सरशार-ए-मोहब्बत
बेकाररहइश्क़मेंतूरोनेसेहरगिज़
येगिर्याहीहैआब-ए-रुख़-ए-कार-ए-मोहब्बत
मुझसाहीहोमजनूँभीयेकबमानेहैआक़िल
हरसरनहीं'मीर'सज़ा-वार-ए-मोहब्बत
  - Meer Taqi Meer
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