aa.e hain meer kaafir ho kar KHuda ke ghar men | आए हैं 'मीर' काफ़िर हो कर ख़ुदा के घर में

  - Meer Taqi Meer
आएहैं'मीर'काफ़िरहोकरख़ुदाकेघरमें
पेशानीपरहैक़श्क़ाज़ुन्नारहैकमरमें
नाज़ुकबदनहैकितनावोशोख़-चश्मदिलबर
जानउसकेतनकेआगेआतीनहींनज़रमें
सीनेमेंतीरउसकेटूटेहैंबे-निहायत
सूराख़पड़गएहैंसारेमिरेजिगरमें
आइंदाशामकोहमरोयाकुढ़ाकरेंगे
मुतलक़असरदेखानालीदन-ए-सहरमें
बे-सुधपड़ारहूँहूँउसमस्त-ए-नाज़बिनमैं
आताहैहोशमुझकोअबतोपहरपहरमें
सीरतसेगुफ़्तुगूहैक्यामो'तबरहैसूरत
हैएकसूखीलकड़ीजोबूहोअगरमें
हम-साया-ए-मुग़ाँमेंमुद्दतसेहूँचुनाँचे
इकशीरा-ख़ानेकीहैदीवारमेरेघरमें
अबसुब्हशामशायदगिर्येपेरंगआवे
रहताहैकुछझमकताख़ूनाबचश्म-ए-तरमें
आलममेंआब-ओ-गिलकेक्यूँँकरनिबाहहोगा
अस्बाबगिरपड़ाहैसारामिरासफ़रमें
  - Meer Taqi Meer
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