kuchh der saadgi ke tasavvur se hat ke dekh | कुछ देर सादगी के तसव्वुर से हट के देख

  - Meer Nazeer Baqri
कुछदेरसादगीकेतसव्वुरसेहटकेदेख
लिक्खाहुआवरक़हूँमुझेफिरउलटकेदेख
मानाकितुझसेेकोईत'अल्लुक़नहींमगर
इकबारदुश्मनोंकीतरहहीपलटकेदेख
फिरपूछनाकिकैसेभटकतीहैज़िन्दगी
पहलेकिसीपतंगकीमानिंदकटकेदेख
ता-उम्रफिरहोगीउजालोंकीआरज़ू
तूभीकिसीचराग़कीलौसेलिपटकेदेख
सज्देतुझेकरेगीकिसीरोज़ख़ुदहयात
बाँहोंमेंहादसात-ए-जहाँकीसिमटकेदेख
तन्हाइयोंमेंसैकड़ोंसाथीभीहैं'नज़ीर'
हैशर्तअपनीज़ातकेहिस्सोंमेंबटकेदेख
  - Meer Nazeer Baqri
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy