“अधूरी नज़्म”

  - Meenakshi Masoom
“अधूरीनज़्म”
हाँवोतोशायरहै,औरसखीमैं
मैंहूँनज़्मउसीकीएकअधूरी
जोकईबरसोंपहलेलिखते-लिखते
छूटगईउनहाथोंसेहीअधूरी
जिनपत्थरसेहाथोंकोनरमीसे
कुछऔरनईनज़्मोंकोबुननाथा
उलझनकेधागोंकोफिरसुलझाके
औरनयेलफ़्ज़सिर्फ़पिरोनेथे
उनकोपहलेसेज़्यादातराशनाथा
उनकोऔरभीज़्यादानिखारनाथा
लेकिनमैंजोउसकीपहलीनज़्महूँ
क्यूँआजअधूरेपनसेबोझिलहूँ
मुझसेेनज़रेमिलतेहीउसनेतो
बैचेनीसेभीपन्नेपलटेहैं
परइकहाथरहाउसकामुझपर
जोबोझनईनज़्मोंकासंभालेथा
वोठहरतासाथएकलम्हामेरे
तोशायदमेराहोकररहजाता
यूँँहीअक्सरपहलीमोहब्बतसी
पहलीनज़्मअधूरीरहजातीहै
क्योंकिकभीवोख़ुदमुझकोकहसका
उसनेमुझकोसिर्फ़लिखाहैअबतक
वोकहदेतोमैंपूरीहोजाऊँ
उसकीआवाज़सेज़िंदाहोजाऊँ
उसेपताहैमैंपूरीहोतेही
ख़ुदसेउसकोपूराकरदूँगी
औरअधूरीहोजाऊँगीफिरसे
वोभीअधूरारहजाएगाफिरसे
  - Meenakshi Masoom
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy