kya bataaun kyuuñ meri raatein sanwarti hi nahin | क्या बताऊँ क्यूँ मेरी रातें सँवरती ही नहीं

  - Meenakshi Masoom
क्याबताऊँक्यूँमेरीरातेंसँवरतीहीनहीं
दूरियाँघटतीनहींनज़दीकियाँबढ़तीनहीं
मैंअगरउसकेबिरहकीआगमेंतपतीनहीं
तोमेरीइसरूहकीरंगतनिखरतीहीनहीं
इकझलकसेउसकीमेराहालयूँँबेहालहै
साँसभीआतीनहींयेजानभीजातीनहीं
उससमुंदरसेमिलनकीआरज़ूकैसेकरूँँ
प्यासजिसकीएकदरियासेकभीबुझतीनहीं
बे-झिझकहोकरमेरेख़ातिरबरसतावोरहा
औरमैंशर्म-ओ-हयाओढ़ेरहीभीगीनहीं
बादलोंकीक़ैदमेंथाचाँदउसकारातभर
इसलिएआँगनमेंउसकेचाँदनीबिखरीनहीं
ख़्वाहिशोंकेआसमाँपरज़ीस्तकरतेहैंबसर
आशिक़ोंकेपाँवकेनीचेज़मींहोतीनहीं
  - Meenakshi Masoom
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