nahin hai faaeda koi bhi aarzoo karkena tere zakhamon ko dega koi rafu karke | नहीं है फ़ाएदा कोई भी आरज़ू करके

  - Meena Bhatt
नहींहैफ़ाएदाकोईभीआरज़ूकरके
तेरेज़ख़्मोंकोदेगाकोईरफ़ूकरके
अदावतोंनेतोजीनामुहालकरडाला
मिलाहैकिसकोयहाँक्यालहू-लहूकरके
येतीरगीतोतुम्हारेभीघरपेजापहुँची
सिलामिलाहैअँधेरायेचारसूकरके
हमारेज़ख़्मोंपेमरहमकोईलगाजाए
सुकूनऐसामिलातुझसेगुफ़्तगूकरके
साथछोड़केग़मकोमेरेबढ़ाअबतू
तकीहूँराहमैंआँखोंकोसुर्ख़रूकरके
गिनारहाहैगुनाहोंकोमेरेहीहरदम
तूआइनाभीकभीरखलेरूबरूकरके
क़लमउठाकेइबादतहैकररहीमीना
ग़ज़लकेशे'रभीकहतीहैवोवज़ूकरके
  - Meena Bhatt
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