ulfat men gham hi gham mile kehna fuzul hai | उल्फ़त में ग़म ही ग़म मिले कहना फ़ुज़ुल है

  - Meena Bhatt
उल्फ़तमेंग़महीग़ममिलेकहनाफ़ुज़ुलहै
प्याराहमेंतोसूदसेअपनायेमूलहै
क्यूँबातबातपेहमेंदेनाहीतूलहै
हैशूलकोईबातकोईबातफूलहै
धोकेपेहमसेफ़रकेकरेंक्यूँमलालहम
क़िस्मतमेंजबकिफूलकेहोनामलूलहै
डरनाहीक्याजोराहएमुहब्बतपेचलपड़े
अबतूमिलेयाग़मतेरासबकुछक़ुबूलहै
लेतेनहींउधारदेतेउधारभी
हरहालबसयहीतोहमाराउसूलहै
हमकोपताहैइश्क़मेंलाज़िमहैंरंजओग़म
ऐसेमेंफिरतोदिलकालगानाहीभूलहै
मीनाकेशे'रअबभीरिसालेहैंइश्क़के
लेकिनवरक़वरक़हैजोअबधूलधूलहै
  - Meena Bhatt
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