chhupaane ki harik ranj-o-gham taaseer rakhte hain | छुपाने की हरिक रंज-ओ-अ़लम तासीर रखते हैं

  - Meena Bhatt
छुपानेकीहरिकरंज-ओ-अ़लमतासीररखतेहैं
अयाँचेहरेसेकबहैजोजिगरमेंपीररखतेहैं
बुलन्दीपरवहीअपनीयहाँतक़दीररखतेहैं
जोहरइककामकरनेकीहसींतदबीररखतेहैं
कभीदिलसेलगातेहैंकभीख़तचूमतेहैंवो
सजाकरअपनीआँखोंमेंमेरीतहरीररखतेहैं
लिखाहैजोहथेलीपरकभीवोमिटपाएगा
हुनरकेसाथहमउस
मेंनईतनवीररखतेहैं
यहाँऐसेसुख़नवरभीहैंजिनकोशे'रकहनेका
सलीक़ाकुछनहींलेकिनतख़ल्लुसमीररखतेहैं
हुनरआताहैउनकोक़त्लकरकेगरछुपानेका
नज़रहमभीमगरअपनीमिसालेतीररखतेहैं
जिसेचाहेंनिगाहोंसेउसेपागलबनाडालें
निगाहोंमेंसनमअपनीयेहमतासीररखतेहैं
ग़ज़लगोईकाजिसमाँनेहुनरहमकोदियामीना
नज़रकेसामनेउसकीसदातस्वीररखतेहैं
  - Meena Bhatt
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